dhobikikutti: earthen diya (Default)
Dhobi Ki Kutti ([personal profile] dhobikikutti) wrote in [community profile] forkedtongues2010-11-06 04:10 pm

Diwali songs

I was going to throw these up for people to listen to, but my internet is borked, so you will have to find the songs on your own. Meanwhile, here are some transcriptions in Devnagari, with the caveat that the songs are in Bhojpuri and Avadhi and various other dialects that I don't know too well, so there are some words there that I have only taken a guess at.

I'll eventually throw up a transliteration and a translation as well, time permitting.

Happy Diwali!

Shubha Mudgal sings in Deepavali Vol. 2



1 - धनतेरस दिन अति सुखदायी

धनतेरस दिन अति सुखदायी
राधा मन अति मोद बढयो है
मनमोहन धन पाई.

राखत प्रीती सहित ह्रदय में
गुरुजन लाज बहाई
द्वाराकेश्प्रभु रसिक लादिलो
निरख निरख मन भाई.

2 - दूध सों स्नान करो मनमोहन

दूध सों स्नान करो मनमोहन
छोटी दिवारी काल मनाएं
करो सिंगार लाल तन वांगो
दूल्हे जरक सीस धाराएं

जैसो श्याम पीत रंग प्यारी मिली
तैसे हि दम्पति परम सुख पाए
आज समागम है प्यारी को
जों निर्धन के धैर पाए

वह छवि देख देख ब्रज जनही
देत अशीस अपुन मन भाई
चिर्जीओं दुल्हनि लाल दोहु
परमान्ददास बलिझाए

3 - घर-घर आंगन होत बधाई

घर-घर आंगन होत बधाई
श्रीरामचंद्र सिंघासन बैठे
छत्र चमर धुलाई

मंगल साज लिए सब सुंदरी
नव सत् सजके आई
तिलक लियो जब अंकुर शिरधर
आरती लो न कराई

जय-जयकार भयो त्रिभुवन में
देवन दुन्दुकी बजाई
सुर नर मुनिजन कोटि करी सों
कौतुक अम्बर छाई

चिर्जीओ अविचल राजधानी
भक्तन के सुखदाई
श्री रघुनाथ चरण कमल रज
रामदास निधि पाई

4 - आज दिवारी मंगलचार

आज दिवारी मंगलचार
ब्रज जुबती मिली मंगल गावत
चौक पुरावत नन्दकुमार

मधुमेवा पकवान मिठाई
भर-भर लीं कंचन थार
परमानन्ददास को ठाकुर
पाहिले आभूषण सिंगार

5 - आज दीपत दिव्य दीपमालिका

आज दीपत दिव्य दीपमालिका
मानो कोटि रवी कोटि चंद्र छवि
विमल भई निशिकालिका

गज मोतिन के चौक पूरामये
बीच-बीच ब्रज प्रवालिका
गोकुल सकल चित्रमणि बंदित
शोबित झाल झमालिका

पहर सिंगार बनी राधा जों
संग लिये ब्रजबालिका
झल-मल दीप समीप सोंझ भर
कर ली कंचन थालिका

पाए निकट मदनमोहन पिय
मानो कमल अलीमालिका
आकुल हसत-हसावत बालन
पटक-पटक दे कालिका

नंद भवन आनंद भधो वती
देखत परम रसालिका
सूरदास कुसुमन सुर बरखत
कर अंजुली पुटमालिका

6 - पांसा खेलत है पिया प्यारी

पांसा खेलत है पीया प्यारी

पहिलों दांव पर्यो स्यामा को
पीत पिचौरी होंवी

स्याम कहें कछु तुमहूँ लगावो
तब नकबेसर डारी
कर बरी छ्ल कर ज्यीतो चाहत
लाल गोवर्धन गारी

अब की बेर पिया मुरली लगावो
तों खेलों या बारी
भूषण सब लगाया सब विट्ठल प्रभु
हारे कुंजबिहारी

7 - शुभ दिन आज दिवारी

शुभ दिन आज दिवारी
कोर बनो कछु ऐरी
द्वै बाजू विक हीरण खचित
दूजों नील जटित सुन लें री

तुम जीतों तो महल-टहल में
रहो प्रवीण सदारी
मैं जीतों तो हां-हां प्यारी
मेरों कुंजबिहारी

आप जानी के श्री राधे ने
जितये रसित सुनाई
विजय सखी यह रस रीती को
रसिक बिना को समझ कहाँ री

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